| 1- देखो काली घटा है घिर आया नाव किनारे को है चल पडा बादल है गरजा तूफ़ान भी लरजा मेरे साजन तुम हो कहाँ ? 2- सन-सन बहे ये पागाल पवन बिजली से आलोकित है गगन क्या करूँ घर में मैं सजन जिया धडके कभी रुके धड़कन घन बरसे सैलाब है बहे मेरे साजन तुम हो कहाँ ? 3- तूफ़ान उत्ताल नाव भी डोले ये घरबार तूफ़ान ले उड़े अब की बार न जाने दूं सजन है मेरा-तुम्हारा अटूट बंधन 4- घनघोर अँधेरा द्वार है खुला ऐसे में सजन तुम आखिर हो कहाँ ? |
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Sunday, April 17, 2011
साजन तुम हो कहाँ ?
Monday, April 11, 2011
नॉएडा में ब्लोगेरो ...
कई शहरों ने अपने ब्लॉगर ढून्ढ लिए .अब लगता है नॉएडा में ब्लोगेरो की कमी है.कुछेक नाम जो मुझे पता है उसमे सतीश सक्सेना जी और मैं यानी अना इसके अलावा और ब्लोगेरो की जानकारी हमें नहीं है . तो नॉएडा के ब्लॉगर क्यों न हम भी एक दुसरे के ब्लॉग के बारे में जानकारी हासिल करे .
टिप्पणि में अपना ब्लॉग सुझाए
Sunday, April 3, 2011
जय हो ...
जय हो |
सेना का नायक वाह भई वाह
सचिन का सपना वाह भई वाह
हो गयी पूरीवाह भई वाह
चैंपियन युवराज वाह भई वाह
टिकाऊ गौतम वाह भई वाह
कप भारत कावाह भई वाह
दुनिया देखे वाह भई वाह
आये जितने वाह भई वाह
सबको पछाड़ा वाह भई वाह
नज़र का टीका वाह भई वाह
सबको लगाऊँ वाह भई वाह
बुरी नज़र तू जा !जा!जा!
Sunday, March 27, 2011
"Indians are poor but India is not poor...
"Indians are poor but India is not poor country." Says one of swiss bank director.He says that"280 lac crore" of Indian money is deposited in swiss banks which can be used for "tax less"budget for 30 years. Can give 60 crore jobs to all Indians.Four lane roads to Delhi from any village . Forever free power supply to more than 500 social projects.Every citizen can get monthly 2000/- for 60 years . No need of World & IMF loan . Think how our money is blocked by rich politicians?We have full right to raise voice against corrupt politicians.
MESSEGE FROM MOBILE
MESSEGE FROM MOBILE
Saturday, March 19, 2011
होली मुबारक
रंगों से भरा मौसम आया
गुलशन खुशबू से महकाया
बच्चे बूढ़े नर नारी सब
होली के रंग में है नहाया
हम तो बस ये चाहे रब से
झोली भर जाए खुशियों से
आओ मिलकर खेले होली
कटुता भूल लग जाए गले से
होली मुबारक
Wednesday, March 2, 2011
जटा में विराजे ...
गले में लिपटे भुजंग
मृग चर्म से लिपटी है
मृग चर्म से लिपटी है
नीलकंठ की कटी
भस्म चर्चित है ये काया
हाथ डमरू डमडमाया
रसातल औ स्वर्ग मर्त्य
रसातल औ स्वर्ग मर्त्य
गूंजे है चहुँ दिशा
नृत्य उनका मन को मोहे
नृत्य उनका मन को मोहे
नटराज स्वरुप वो है
शरणागत हम है उनके
शरणागत हम है उनके
स्वरुप ये मन को भाया
कर लो स्तुति शंकर की
कर लो स्तुति शंकर की
पा लो वर अपने मन की
हर हर हर महादेव
हर हर हर महादेव
समर्पित है ये काया
मेरी ही पुरानी रचना से उद्धृत
Monday, February 28, 2011
प्रेम
ये व्याकुल वकुल के फूलों पर भ्रमर मरता पथ घूम-घूम कर
आसमान में ये कैसी सुगबुगाहट वायू मे भी एक फुसफुसाहट
ये वनांचल भी पुलकित होकर झूमे ये भ्रमर भी पथ भूलकर घूमे
ये मन वेदना सुमधुर होकर खुश है आज भुवन में बहकर
वंशी में है तानपुरी सी माया ये कौन है जो मेरे मन को चुराया
ये निखिल विश्व भी मरे घूम-घूम कर और मै मरुँ विरह सागर के तट पर
आसमान में ये कैसी सुगबुगाहट वायू मे भी एक फुसफुसाहट
ये वनांचल भी पुलकित होकर झूमे ये भ्रमर भी पथ भूलकर घूमे
ये मन वेदना सुमधुर होकर खुश है आज भुवन में बहकर
वंशी में है तानपुरी सी माया ये कौन है जो मेरे मन को चुराया
ये निखिल विश्व भी मरे घूम-घूम कर और मै मरुँ विरह सागर के तट पर
गुरुदेव की रचना से अनुदित
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