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Saturday, August 7, 2010

फिल्म इश्किया में गुलज़ार जी का

फिल्म इश्किया में गुलज़ार जी का लिखा हुआ गाना जिसे रेखा  भारद्ववाज जी ने गाया है को मैंने अपनी आवाज़ में गाने
की कोशिश की है गुस्ताखी माफ़ पर सुन लीजिये
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Friday, August 6, 2010

विरह


दुःख तुमने जो दिए
   सहा न जाए
सुख मुझसे दूर भागे
   रहा न जाए


वंचित हूँ तुम्हारे प्यार से
   क्यों समझ ना आये
कटी हूँ मैं जीवन से कैसे
   कहा ना जाए


तुम्हारा वो संगसुख
   भुलाया ना जाए
वो मृदु स्पर्श प्रेम वचन
   क्यों याद आये


वो आलिंगन वो दुःख-सुख में 
   साथ का किया था वादा 
कैसे मै विस्मरण करूँ उन पलों को 
   वो स्मरण रहेंगे सदा 


तुमने अपने दायित्व  से 
   क्यों मूंह फेर लिया 
कोई गुप्त कारण है या यूं ही
   मुझे रुसवा किया 


क्यों ऐसा लगे की तुम 
   अवश्य लौटोगे 
मेरे साथ किया गया वादा 
तुम अवश्य निभाओगे 


ये जो लोग कहे की जानेवाला 
   वापस न आये कभी 
मै जानूं तुम कोई गया वक्त नही हो 
   जो लौट न पाओगे




ज़रा इधर भी .....
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Thursday, August 5, 2010

काली घटा

ये काली घटा ने देखो
  क्या रंग दिखाया
नाच उठा मन मेरा
  हृदय ने गीत गाया

सूखी नदियाँ प्लावित हुई
  जीवन लहलहाया
दादुर,कोयल,तोता,मैना ने
  गीत गुनगुनाया

तप्त धरती शीतल हुई
  बूंदे टपटपाया
धरती ने आसमान को छोड़
  बादल को गले लगाया

रवि ज्योति मंद पड़ा
  मेघ गड़गड़ाया
नृत्य मयूर का देख
 ये मन मुस्कराया

अब इसे भी बर्दाश्त कर लीजिये
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Tuesday, August 3, 2010

नियति

न सरकार से डर 
न सरकार को डर 


न पुलिस से डर 
न पुलिस को डर 


गर हो आम जनता 
तो भटको दर-ब-दर


ये गिरता  प्रशासन स्तर
और ये जीवन तीतर बीतर 

Monday, August 2, 2010

मुर्किया

बैठे बैठे अचानक मुझे आमिर खुसरो के दो पहेलियाँ याद आ गयी जो कभी स्कूल में पढ़ा था पर उतार तो आपको ही देना है सोच कर जवाब दीजिएगा

अट्टी तोड़ कर घर में आया
अरतन-बरतन सब सरकाया
खा गया पी गया दे गया बुत्ता
क्यों सखी साजन ? ना सखी ..........(उत्तर)

अचरज बँगला एक बनाया
ऊपर नीव तले घर छाया
बांस ना बल्ली बंधन घने
कहो खुसरो घर कैसे बने ?............(उत्तर)

मैंने अपने ब्लॉग को hamarivani.com से जोड़ने के लिए

मैंने अपने ब्लॉग को hamarivani.com से जोड़ने के लिए बहुत सारी कोशिशे की पर ठीक से जुड़ नही पा रहा  क्या करू कोई मुझे बताये . समस्या ये है की मेरा खाता तो बन गया पर पोस्ट नही दिख रहा है कोई समस्या निवारण करे

Sunday, August 1, 2010

झलकियाँ



बंगाली शादियों में कलात्मकता प्रत्येक कार्य में झलकता है जैसे नीचे देखिये किस खूबसूरती से सारी से नाव बनाया गया है 
 और ये चप्पल  अरे ! अरे ! इसे चप्पल मत कहिये ये तो अमावट है जब मनचाहे इसे खा सकते है
क्यों कैसी  रही ?
अब मेरी आवाज़ भी सुन लीजिये 




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