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Sunday, April 18, 2010

हल्ला बोल


पथिक तू चलते रहना थक मत जाना 
पथिक रे मुखरित होना चुप मत रहना 
पथिक हाय क्यों तू गुमसुम डर मत है हम 
पथिक तू नहीं अकेला तुझे है समर्थन 

तू बस इतना कर दे आवाज़ उठा ले 
सोते हुए को झट जगा दे 
जो है भ्रष्टाचारी , हत्यारे और आतंकी 
स्थान नहीं ऐसों का हो प्रण ये जन जन की 

पथिक टी बोल देश के तथाकथित उन भद्र जनों को 
भद्रता है क्या ये अन्याय देखकर चुप बैठे वो 
जमकर हल्ला बोए विरोध जताए की है उनको परेशानी 
क्यों ये सहते रहते है और अधिक सहने की है ठानी 

भीरुता और कायरता द्योतक है निर्बल देश का 
पर हम है बलशाली त्याग दे मन की सब कायरता 
हमें तो करना है निर्माण एकीकृत भद्र समाज की 
जहां न हो स्थान इन हत्यारों , भ्रष्टों और आतंक की 

2 comments:

  1. बहुत अच्‍छे।

    ReplyDelete
  2. भीरुता और कायरता द्योतक है निर्बल देश का
    पर हम है बलशाली त्याग दे मन की सब कायरता
    हमें तो करना है निर्माण एकीकृत भद्र समाज की
    जहां न हो स्थान इन हत्यारों , भ्रष्टों और आतंक की



    bahut khub



    shekhar kumawat
    http://kavyawani.blogspot.com/\

    ReplyDelete

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